मैंने ये कहकर उस सेे इज़हार किया है
सिर्फ़ तुम्हीं से और तुम्हीं से प्यार किया है
जगना लाज़िम है गर 'इश्क़ में फिर तो मैंने
सोकर मेरी रातों को बेकार किया है
तुमको गीलापन ही दिखना है तुमको क्या
कितनी मुश्किल से दरिया को पार किया है
उसके घर को दफ़तर बना लिया है जबसे
ख़ुद को हर दिन अच्छे से तैयार किया है
इक इस बात का पछतावा नहीं जाता, मैंने
जंग में दुश्मन पर पीछे से वार किया है
बुरा भला मत कहना उस लड़की को 'साहिर'
तुम अच्छे नहीं लगते थे तब ही इंकार किया है
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