vo thii tab hote the kitne achchhe khaase phool | वो थी तब होते थे कितने अच्छे ख़ासे फूल

  - Saahir

वो थी तब होते थे कितने अच्छे ख़ासे फूल
उसके बाद में देखो कैसे हैं मुरझाए फूल

सिगरेटों ज़ामों ने तो अब दामन थामा है
एक ज़माने में इन हाथों में होते थे फूल

कांटे भी अच्छे लगते गर वो देते ख़ुशबू
और इन फूलों से होती नफ़रत जो चुभते फूल

छोड़ दिया है जंगल को जब से मैने देखो
नहीं लगे उन पेड़ों पर फ़िर पहले जैसे फूल

इक ऐसी दुनिया बन सकती है क्या जिस
में हो
ये सब लड़की कांटे और बनें सब लड़के फूल

'उम्र का हर इक पड़ाव कुछ यूँं देखा है मैने
देखे हैं मैने उगते खिलते और झड़ते फूल

अपने गांव बैठ कर सोच रहा था मैं ये सब
कौन ख़रीदेगा अब उस शहरी औरत के फूल

  - Saahir

Rose Shayari

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