ग़मों को यूँँ छुपाना है
मिलो तो मुस्कुराना है
जबीं को चूम कर बोली
निशाँ सबको दिखाना है
निगाहें फेर कर रखना
बड़ा तीखा निशाना है
कोई आवाज़ है या फ़िर
कहीं बाजे तराना है
पलस्तर गिरने पर समझा
मकाँ काफी पुराना है
डराए जो मुझे शब तो
तुम्हें सूरज ले आना है
बता दो, आप, तुम या तू
तुम्हें कैसे बुलाना है
कहाँ उलझा हुआ हूँ मैं
ये कैसा ताना बाना है
ग़मों पर रो रहे हो क्यूँ
ये दुनिया इक फ़साना है
भरी चाबी ख़ुदा ने जो
क़ज़ा तक चलते जाना है
ये गीता ने सिखाया है
कि मक़सद मोक्ष पाना है
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