वो थी तब होते थे कितने अच्छे ख़ासे फूल
उसके बाद में देखो कैसे हैं मुरझाए फूल
सिगरेटों ज़ामों ने तो अब दामन थामा है
एक ज़माने में इन हाथों में होते थे फूल
कांटे भी अच्छे लगते गर वो देते ख़ुशबू
और इन फूलों से होती नफ़रत जो चुभते फूल
छोड़ दिया है जंगल को जब से मैने देखो
नहीं लगे उन पेड़ों पर फ़िर पहले जैसे फूल
इक ऐसी दुनिया बन सकती है क्या जिस
में हो
ये सब लड़की कांटे और बनें सब लड़के फूल
'उम्र का हर इक पड़ाव कुछ यूँं देखा है मैने
देखे हैं मैने उगते खिलते और झड़ते फूल
अपने गांव बैठ कर सोच रहा था मैं ये सब
कौन ख़रीदेगा अब उस शहरी औरत के फूल
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