रिश्ते में बे-वफ़ाई शायद मिला रहा है
वो ऐब याद मेरे मुझ को दिला रहा है
आवाज़ में नमी है चेहरे पे है उदासी
वो मुँह छुपा के मुझ से पर खिलखिला रहा है
नफ़रत टपक रही है तक़रीर से सनम की
लफ़्ज़ों से ज़हर मुझ को हम दम पिला रहा है
यूँ ख़ाक कर गुलिस्ताँ मेरा मुराद वाला
वो ग़ैर के लिए फिर नौ गुल खिला रहा है
मेरे लिए कई थीं उलझन सनम के मन में
बे-ख़ौफ़ अब किसी से वो दिल मिला रहा है
जब फ़ाश हो गए सब उस यार के इरादे
है कर रहा तमाशा वो तिलमिला रहा है
— Rubball















