कभी ये आब होती है कभी ये ख़्वाब होती है
दिखाई दे सनम तो ये पलक सैलाब होती है
मुझे रग़बत नहीं है इस ज़माने में किसी से भी
तेरी माशूक़ बस तेरे लिए बेताब होती है
कहीं कोई पुकारे नाम जो तेरा कभी यूँही
मिरी सूखी निगाहें एक दम शादाब होती है
लकीरें बन गई हैं देख लो चेहरे पे अश्कों की
विरह में अश्क की तो बूँद भी तेज़ाब होती है
बिना तेरे मुझे ये चाँद रातें भी नहीं भाती
अगर तू साथ हो तो फिर तिमिर महताब होती है
— Rubball















