kaun hai aisa ki jo tanhaa nahin hai | कौन है ऐसा कि जो तन्हा नहीं है

  - Siddharth Saaz

कौन है ऐसा कि जो तन्हा नहीं है
बस तेरी ही आँख में सहरा नहीं है

तेरे कहने से न होता हो भले कुछ
ऐसे चुप हो जाना भी अच्छा नहीं है

अब नहीं हैं लोग जो दुनिया थे पहले
और ये दुनिया भी अब दुनिया नहीं है

मैं न कहता था की सबकुछ झूठ है ये
तू ही कहता था, "नहीं ऐसा नहीं है"

वो भला क्यूँँ मेरी ग़ज़लें गुनगुनाए
उसके होंठो पर अभी लिक्खा नहीं है

तू तो वाक़िफ़ है रिवाज़-ए-ग़म से इसके 'इश्क़ तो तेरा भी ये पहला नहीं है

मेरा जिसको होना है, उसका हो पहले
वो मिरा क्या होगा जो उसका नहीं है

  - Siddharth Saaz

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