चंद लम्हें ज़िन्दगी जीने को भीमुद्दतों तक ज़िंदा दिखना पड़ता हैघर पे कुछ शामें बिताने के लिएदिन महीनों कोड लिखना पड़ता है— Surendra Bhatia "Salil"