kya sitaaron ko taka hai raat bhar pal pal kabhi | क्या सितारों को तका है रात भर पल पल कभी

  - Sandeep Thakur

क्या सितारों को तका है रात भर पल पल कभी
चाँद के गालों पे पड़ते देखे हैं डिम्पल कभी

नाम मेरा याद करके चुस्कियों के बीच में
क्या हुई है चाय के कप में तिरे हलचल कभी

जानता हूँ 'उम्र भर तू साथ दे सकता नहीं
पर ज़रा सी दूर तक तो साथ मेरे चल कभी

सर्च करना है मुझे बे-कार इंटरनेट पर
धड़कनों में अपनी मेरा नाम कर गूगल कभी

उँगलियों से कुछ सरकता सा लगे है आज तक
छू गया था हाथ से इक रेशमी आँचल कभी

घुंघरूओं के सुर जगेंगे छत की हर मुंडेर से
सीढ़ियाँ चढ़ ले वो गर पहने हुए पायल कभी

ये समझ लेना कोई रोया बहुत है याद में
फैल जाए जब तुम्हारी आँख से काजल कभी

चंद किरनें धूप की छन कर हुई बस साँवली
रोक पाए पर कहाँ सूरज को ये बादल कभी

  - Sandeep Thakur

Good night Shayari

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