तुम्हें तुम से चुराना चाहता हूँ
कहीं दिल में छुपाना चाहता हूँ
भले मुमकिन नहीं है तुम को पाना
मैं ख़ुद को आज़माना चाहता हूँ
कभी बच्चों से थी यारी हमारी
मैं फिर से खिलखिलाना चाहता हूँ
बहुत से लोग तुम से आश्ना हैं
मैं सब का जी जलाना चाहता हूँ
किसी ख़ामोश दरिया के किनारे
मैं तुझ में डूब जाना चाहता हूँ
— Sanjay Bhat















