दिल ये मुझ सेे कहता है
कैसे दर्द को सहता है
बाक़ी सब तो ठीक है फिर
सहमा सा क्यूँ रहता है
इक रिश्ते की उलझन में
डरा डरा सा रहता है
तेरी आँखें कहती हैं
इश्क़ में रोना रहता है
उस को जब आना ही नइँ
क्यूँ मुंतज़िर तू रहता है
— Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
कैसे दर्द को सहता है
बाक़ी सब तो ठीक है फिर
सहमा सा क्यूँ रहता है
इक रिश्ते की उलझन में
डरा डरा सा रहता है
तेरी आँखें कहती हैं
इश्क़ में रोना रहता है
उस को जब आना ही नइँ
क्यूँ मुंतज़िर तू रहता है
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