जिस आदमी की चाय से यारी नहीं
उन से हमारी कोई दिलदारी नहीं
अब हक़ जताना छोड़ दो दिल पे मिरे
ये आप के पुश्तों की अलमारी नहीं
हाँ अक्ल अच्छी चीज़ हैं लेकिन मियाँ
ये इश्क़ है इस में समझदारी नहीं
शाइ'र बना है कौन मर्ज़ी से यहाँ
किस को भला ये ज़िंदगी प्यारी नहीं
मासूमियत की ही अगरचे बात हैं
हम ने किसी को आँख भी मारी नहीं
— Saurabh















