आप हैं महव-ए-दुआ रब से हुकूमत के लिए
और हम महव-ए-दुआ रब से हैं चाहत के लिए
सज गया हिज्र के मारों के लिए मयख़ाना
मजलिस-ए-मय में चले आइए शिरकत के लिए
तुम लुटाते रहे दुनिया में मोहब्बत अपनी
हम तरसते रहे ता-उम्र मोहब्बत के लिए
वक़्त के हाथों मैं मजबूर हूँ ऐ जान-ए-वफ़ा
मन नहीं करता वतन से मेरा हिजरत के लिए
ज़ुल्म के आगे कभी सर न झुकाया तुमने
दाद देते हैं शजर आपकी हिम्मत के लिए
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shajar Abbas
our suggestion based on Shajar Abbas
As you were reading Patriotic Shayari Shayari