ashkon se vo daaman ko bhigone nahin deta | अश्कों से वो दामन को भिगोने नहीं देता

  - Shajar Abbas

अश्कों से वो दामन को भिगोने नहीं देता
रोता हूँ मैं गर वो मुझे रोने नहीं देता

जो शख़्स मिरे बाद में बन बैठा किसी का
वो शख़्स किसी का मुझे होने नहीं देता

होता जो मिरे बस में तो वा'दा है मिरे दिल
मैं ग़म का तुझे बोझ ये ढोने नहीं देता

करता हूँ बहुत कोशिशें सोने की मगर ये
यादों का सफ़र चैन से सोने नहीं देता

अब कैसे शजर सीने से निकलेगा ज़मीं के
जब बीज बता तू मुझे बोने नहीं देता

  - Shajar Abbas

Safar Shayari

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