बहर-ए-ख़ुदा सदा-ए-दिल-ए-बे-क़रार सुन
है इल्तिजा दुआ-ए-दिल-ए-बे-क़रार सुन
ज़ख़्मी हैं जिस्म ख़्वाबों का आँखों के दश्त में
हर सू हैं हाए हाए-दिल-ए-बे-क़रार सुन
आँखों की नींद चैन सुकूँ सारा लुट गया
मज़लूम से जफ़ा-ए-दिल-ए-बे-क़रार सुन
करने लगा था हुस्न की तक़लीद ना समझ
इतनी सी है ख़ता-ए-दिल-ए-बे-क़रार सुन
लब पर शजर था ख़म थी कमर आँखों में था ख़ूँ
मक़तल से ऐसे आए-दिल-ए-बे-क़रार सुन
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shajar Abbas
our suggestion based on Shajar Abbas
As you were reading Khwab Shayari Shayari