दिख गया है मिरा हिलाल मुझे
रास आए शब-ए-विसाल मुझे
इक नई तू बना मिसाल मुझे
अपनी सोहबत में यार ढाल मुझे
दिल तिरा हँस के जीत सकता हूँ
रब ने बख़्शा है ये कमाल मुझे
वो तिरे साथ जो बिताए थे
याद आते हैं चार साल मुझे
मैं तिरा दर्द-ए-दिल समझता हूँ
मत दिखा अपने दिल का हाल मुझे
ऐ ग़रीब-उल-वतन ख़ुदा की क़सम
तेरी ग़ुर्बत पे है मलाल मुझे
मेरी देकर मिसाल महफ़िल में
कर दिया उसने बे-मिसाल मुझे
'इश्क़ के नाम पर वो अरसे से
कर रहा था बस इस्तिमाल मुझे
तेरी ग़ुर्बत का वास्ता तुझे दिल
'इश्क़ की क़ैद से निकाल मुझे
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