dil uskaa har ghadi yaaron chaman men lagta tha | दिल उसका हर घड़ी यारों चमन में लगता था

  - Shajar Abbas

दिल उसका हर घड़ी यारों चमन में लगता था
वो फूल जैसी थी तो तितलियों से रिश्ता था

थीं आँखें शरबती क़द उसका थोड़ा छोटा था
गुलाबी रंग था और शीरीं दार लहजा था

सियाह जुल्फें थी काली घटाओं के जैसी
फ़लक के चाँद नुमा मुर्शिद उसका चेहरा था

लब उसके लगते थे दो प्यारी तितलियों की तरह
लबों पे उसके तबस्सुम हमेशा रहता था

वो अपना सर मेरे पहलू में ला के रखती थी
मैं उसकी रेशमी ज़ुल्फें सँवारा करता था

उसे किताबों से बे-इन्तिहा मोहब्बत थी
किताब ख़ाने में उसको क़रार मिलता था

  - Shajar Abbas

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