dosto naghma ye gaao das december aa gaii | दोस्तो नग़्मा ये गाओ दस दिसम्बर आ गई

  - Shajar Abbas

दोस्तो नग़्मा ये गाओ दस दिसम्बर आ गई
मिलके सब खुशियाँ मनाओ दस दिसम्बर आ गई

हमको सीने से लगाओ दस दिसम्बर आ गई
ख़ौफ़ मत दुनिया का खाओ दस दिसम्बर आ गई

इब्तिदा-ए-रक्स-ए-पैहम बर सर-ए-महफ़िल करो
और सबको मय पिलाओ दस दिसम्बर आ गई

मुंतज़िर इस रोज़ की तुम थी बड़ी शिद्दत के साथ
शाहज़ादी मुस्कुराओ दस दिसम्बर आ गई

मेरी लम्बी 'उम्र की अल्लाह से माँगो दुआ
नज़्र जान-ए-जाँ दिलाओ दस दिसम्बर आ गई

साल-ए-नौ पर जान मेरी साल-ए-माज़ी की तरह
केक हाथों से बनाओ दस दिसम्बर आ गई

यौम-ए-आमद पर चलो चलकर मुबारकबाद दो
और सारा घर सजाओ दस दिसम्बर आ गई

ख़त्म लो माह-ए-नवंबर हो गया ख़ुशियों भरा
दोस्तो को ये बताओ दस दिसम्बर आ गई

ख़त लिखो सब दोस्तों को और ये पैग़ाम दो
मुंतज़िर हूँ जल्द आओ दस दिसम्बर आ गई

कह रहा है चाँद सा चेहरा लिए कोई 'शजर'
मोमबत्ती केक लाओ दस दिसम्बर आ गई

  - Shajar Abbas

Rahbar Shayari

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