gham zada mat baithiye yuñ mere bhai keejie | ग़म ज़दा मत बैठिए यूँँ मेरे भाई कीजिए

  - Shajar Abbas

ग़म ज़दा मत बैठिए यूँँ मेरे भाई कीजिए
मुस्कुराते जाइए नग़्मा-सराई कीजिए

मुश्किलों में घिर गए हैं कह रहे हैं बारहा
आन कर मुश्किल कुशा मुश्किल कुशाई कीजिए

जो भी हैं माज़ी के हमसे सारे शिकवे छोड़ कर
हम-नवा हमदम हमारी हम-नवाई कीजिए

बा वफ़ा हैं हम वफ़ा करते रहेंगे 'उम्र भर
बे वफ़ा हैं आप खुल कर बे वफ़ाई कीजिए

दे रहे हैं क़ैस का तुम को शजर हम वास्ता
हिज्र के रस्तों पे आकर रह नुमाई कीजिए

  - Shajar Abbas

Budhapa Shayari

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