हैं तज़किरे का सबब साहेबान में ज़ुल्फ़ें
तेरी सँवारूगा मैं इत्मीनान में ज़ुल्फ़ें
हैं जिस तरह मेरे हमसाए की सुनो यारों
नहीं हैं ऐसी किसी की जहान में ज़ुल्फ़ें
सवाल आया था क्या है सबब घटाओं का
मैं लिख के आ गया बस इम्तिहान में ज़ुल्फ़ें
जो बोसा देके गई थी हमारे चेहरे पर
हाँ अब तलक हैं मुसलसल वो ध्यान में ज़ुल्फ़ें
हूँ रब से महव-ए-दुआ मेरे दिलनशी की सदा
शजर ख़ुदा रखे हिफ्ज़-ओ-अमान में ज़ुल्फ़ें
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