hain tazkire ka sabab sahebaan men zulfen | हैं तज़किरे का सबब साहेबान में ज़ुल्फ़ें

  - Shajar Abbas

हैं तज़किरे का सबब साहेबान में ज़ुल्फ़ें
तेरी सँवारूगा मैं इत्मीनान में ज़ुल्फ़ें

हैं जिस तरह मेरे हमसाए की सुनो यारों
नहीं हैं ऐसी किसी की जहान में ज़ुल्फ़ें

सवाल आया था क्या है सबब घटाओं का
मैं लिख के आ गया बस इम्तिहान में ज़ुल्फ़ें

जो बोसा देके गई थी हमारे चेहरे पर
हाँ अब तलक हैं मुसलसल वो ध्यान में ज़ुल्फ़ें

हूँ रब से महव-ए-दुआ मेरे दिलनशी की सदा
शजर ख़ुदा रखे हिफ्ज़-ओ-अमान में ज़ुल्फ़ें

  - Shajar Abbas

Sukoon Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading Sukoon Shayari Shayari