ik pal sukoon se sone na degi ghamon kii raat | इक पल सुकूँ से सोने न देगी ग़मों की रात

  - Shajar Abbas

इक पल सुकूँ से सोने न देगी ग़मों की रात
मुझ पर नया अज़ाब बनेगी ग़मों की रात

हमराह मेरे चलती रहेगी ग़मों की रात
मैं सोचता हूँ कैसे कटेगी ग़मों की रात

ये लग रहा है दश्त में हमराह बैठ कर
जी भर के मुझसे बातें करेगी ग़मों की रात

ख़ुशियों का आफ़ताब न होगा कभी तुलू
पल पल तवील होती रहेगी ग़मों की रात

  - Shajar Abbas

Neend Shayari

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