इल्तेजा है 'इश्क़ का ऊँचा ये परचम कीजिए
बिन्ते हव्वा से मोहब्बत इब्ने आदम कीजिए
कायनात-ए-इश्क़ मेरी लुट गई ग़म कीजिए
आइए बरबादियों का मेरी मातम कीजिए
रोइए सहरा में चलकर फ़ुर्क़त-ए-महबूब में
क़ैस के ज़ख़्म-ए-जिगर का आप मरहम कीजिए
टूटता है जिस्म से साँसों का धागा आइए
आख़िरी दीदार मेरा मेरे हमदम कीजिए
आप आशिक़ हैं शजर तो आप पर लाज़िम है ये
तुर्बत-ए-मजनू पे चलिए अपना सर ख़म कीजिए
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shajar Abbas
our suggestion based on Shajar Abbas
As you were reading I love you Shayari Shayari