jaagi hai bhanware ke dil men phir muhabbat phool kii | जागी है भँवरे के दिल में फिर मुहब्बत फूल की

  - Shajar Abbas

जागी है भँवरे के दिल में फिर मुहब्बत फूल की
लायक़-ए-दीदार है गुलशन में हैरत फूल की

फूल को ख़ारों में ऐसे देख के हैराँ न हो
ख़ार करते हैं ज़माने से हिफ़ाज़त फूल की

आपने तो हाथ में लेकर मसल डाला इसे
आपने सचमुच नहीं जानी फ़ज़ीलत फूल की

जब से हिजरत का सुना भँवरे का देखो फूल ने
तब से बदली जा रही है हाए रंगत फूल की

बाग़बाँ गुलशन से इक दिन फूल सारे ले गया
भँवरे करते रह गए गुलशन में चाहत फूल की

  - Shajar Abbas

Judai Shayari

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