kasrat se kariye aap shajar ain sheen kaaf | कसरत से करिए आप शजर ऐन शीन काफ़

  - Shajar Abbas

कसरत से करिए आप शजर ऐन शीन काफ़
अच्छा है मेरी जान-ए-जिगर ऐन शीन काफ़

तारीख़-ए-आशिक़ी को पढ़ो थोड़ा ग़ौर से
मजनू को कर चुका है अमर ऐन शीन काफ़

दुनिया लुगत में ढूँढे मआनी रदीफ़ के
तू इस तरह से 'इश्क़ को कर ऐन शीन काफ़

दिल को सुकूँ मिलेगा हर इक लम्हा आपके
करने लगोगे आप अगर ऐन शीन काफ़

नज़रें उठा के देखो ज़माने में चार सू
आबाद कर रहा है नगर ऐन शीन काफ़

नस्लों में ज़िंदा रखना वसीयत ये आख़िरी
मेरी तरह से करना पिसर ऐन शीन काफ़

दम तोड़ देगी देखना नफ़रत ख़ुद एक दिन
करता रहेगा यारों सफ़र ऐन शीन काफ़

दिल से लगा के देख मोहब्बत का इक शजर
नायाब तुझको देगा समर ऐन शीन काफ़

  - Shajar Abbas

Dushman Shayari

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