निशान-ए-तुर्बत-ए-लैला-ओ-क़ैस मिट न सकेदिफा है आप पे वाजिब सुनो गर आशिक़ होअगरचे इश्क़ पे आँच आई जाँ लूटा देंगेये बात बर सरे महफ़िल कहो गर आशिक़ हो— Shajar Abbas