ले रहा हूँ फूल को अपनी अमाँ में देखिए
फैली है ख़ुशबू हर इक सू आशियाँ में देखिए
वादी-ए-फ़िरदौस से बढ़कर सुकून-ओ-चैन हैं
शैख़ जी आकर कभी कू-ए-बुताँ में देखिए
दौर-ए-माज़ी सी ज़ुलेख़ा दौर-ए-हाज़िर में भी है
आइए यूसुफ़ ज़रा फिर से जहाँ में देखिए
हसरत-ए-दीदार-ए-जान-ए-जानाँ मुर्शिद शाम से
वसवसे लेने लगी क़ल्ब-ए-तपाँ में देखिए
दर-ब-दर कूचा-ब-कूचा रोज़-ओ-शब शाम-ओ-सहर
क़ैस के मानिंद फिरता हूँ जहाँ में देखिए
एक बच्चा मुफ़लिसी का तन पे डाले पैरहन
भूख से बेचैन है आग़ोश-ए-माँ में देखिए
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