nazar tumhaari hamaari nazar se mil jaa.e | नज़र तुम्हारी हमारी नज़र से मिल जाए

  - Shajar Abbas

नज़र तुम्हारी हमारी नज़र से मिल जाए
तो कोई याद नई इस सफ़र से मिल जाए

मैं टूटे दिल की इमारत में ढूँढता हूँ मुझे
तिरी निशानी ही मिस्मार घर से मिल जाए

था तन पे सर तो मैं दस्तार को बचाता रहा
वो चाहता था के दस्तार सर से मिल जाए

तमाम 'उम्र न फ़ुर्क़त के फूल मुरझाएँ
अगर जो पानी इन्हें चश्म-ए-तर से मिल जाए

अगर मुसल्ले पे बैठो तो ये दुआ करना
मिरे इलाही शजर फिर शजर से मिल जाए

  - Shajar Abbas

Dua Shayari

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