pahle har yaad teri shaamil kii | पहले हर याद तेरी शामिल की

  - Shajar Abbas

पहले हर याद तेरी शामिल की
हमने फिर अपने घर में महफ़िल की

आज कल दिल ही दिल में सोचे हैं
भूल जाएँ गली तिरे दिल की

दश्त में सर मिरा क़लम कर के
साँस रूकने लगी है क़ातिल की

मैं करूँँगा मुख़ालिफ़त उसकी
जो हिमायत करेगा बातिल की

हिज्र की तेग़ से सितम गर ने
सब रगे काट दीं मिरे दिल की

मेरी इमदाद कर शजर आकर
है घड़ी आज मुझ पे मुश्किल की

  - Shajar Abbas

Hijrat Shayari

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