qalb-e-aleel ki hai ye hasrat mataa-e-jaan | क़ल्ब-ए-अलील की है ये हसरत मता-ए-जाँ

  - Shajar Abbas

क़ल्ब-ए-अलील की है ये हसरत मता-ए-जाँ
करने तुम आओ इसकी अयादत मता-ए-जाँ

दिल में हैं गर ख़्याल-ए-मोहब्बत मता-ए-जाँ
वाजिब है तुम पे लैला की बैअत मता-ए-जाँ

बस ज़िक्र है ये बज़्म-ए-सुख़न-वर में रात दिन
मिलती है तेरी चाँद से सूरत मता-ए-जाँ

जब से सुना हैं हमसे मोहब्बत है आपको
सब कर रहे हैं यार ये हैरत मता-ए-जाँ

मर जाऊँ मैं तो रोना नहीं याद में मेरी
तुमसे ये आख़िरी है वसीयत मता-ए-जाँ

साँसों की जिस तरह से ज़रूरत है जिस्म को
मुझको है ऐसे तेरी ज़रूरत मता-ए-जाँ

आ जाना मुझसे करने मुलाक़ात ख़्वाब में
मिल जाए तुझको थोड़ी जो फ़ुर्सत मता-ए-जाँ

दीदार कर के चाँद से चेहरे का आपके
दिल को हमारे मिलती है राहत मता-ए-जाँ

गोदी तुम्हारी ख़ुशियों से हर दम भरी रहे
रब की हो तुम पे ख़ूब इनायत मता-ए-जाँ

महव-ए-दुआ है हक़ में तेरे रब से यूँँ 'शजर'
तुझ पर कोई ना आए मुसीबत मता-ए-जाँ

  - Shajar Abbas

Eid Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading Eid Shayari Shayari