शजर बताइए बज़्म-ए-सुख़न में क्या करिए
तबस्सुम-ए-लब-ए-दिलबर का तज़्किरा करिए
इसे उड़ाओ मुसव्विर लिबास-ए-शर्म-ओ-हया
ख़ुदारा फूल को मत ऐसे बे-रिदा करिए
शब-ए-फ़िराक़ शब-ए-आख़िरी हो मेरे लिए
बिछड़ते वक़्त ये अल्लाह से दुआ करिए
हमारे दिल को दुखाते हुए ऐ अहल-ए-जफ़ा
ख़ुदा-ए-पाक की थोड़ी सी तो हया करिए
शजर यहाँ पे नहीं कुछ सिवाए रुसवाई
अमीर लोगों की सोहबत से फ़ासला करिए
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