shajar bataiye bazm-e-sukhan men kya kariye | शजर बताइए बज़्म-ए-सुख़न में क्या करिए

  - Shajar Abbas

शजर बताइए बज़्म-ए-सुख़न में क्या करिए
तबस्सुम-ए-लब-ए-दिलबर का तज़्किरा करिए

इसे उड़ाओ मुसव्विर लिबास-ए-शर्म-ओ-हया
ख़ुदारा फूल को मत ऐसे बे-रिदा करिए

शब-ए-फ़िराक़ शब-ए-आख़िरी हो मेरे लिए
बिछड़ते वक़्त ये अल्लाह से दुआ करिए

हमारे दिल को दुखाते हुए ऐ अहल-ए-जफ़ा
ख़ुदा-ए-पाक की थोड़ी सी तो हया करिए

शजर यहाँ पे नहीं कुछ सिवाए रुसवाई
अमीर लोगों की सोहबत से फ़ासला करिए

  - Shajar Abbas

Haya Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading Haya Shayari Shayari