“यक़ीन”
यक़ीन जानो हमारा सनम ख़ुदा की क़सम
तुम्हारे हुस्न पे जिस रोज़ से पड़ी है नज़र
हमारी आँखों की बीनाई में इज़ाफ़ा है
हमें ये दुनिया हसीन-ओ-जमील लगती है
हर एक जिस्म हमें फूल जैसा दिखता है
तमाम आँखें हमें क़हक़शाँ सी दिखती हैं
तमाम होंठ हमें पत्तियों से दिखते हैं
यक़ीन जानो हमारा सनम ख़ुदा की क़सम
— Shajar Abbas















