दिल-ए-फ़सुर्दा को यूँँ शाद कर रहा है कोईहर एक लम्हा तुम्हें याद कर रहा है कोईमेरे ख़ुदा मेरी क़िस्मत में तू शजर लिख देख़ुदा से रोज़ ये फ़रियाद कर रहा है कोई— Shajar Abbas