हिज्र ने छीन लिया है मेरी बीनाई कोमैं तरसता हूँ मसीहा की मसीहाई कोइतनी तन्हाई है मुझमें कि अजब मंज़र हैमुझ से डर लगने लगा है मेरी तन्हाई को— Shajar Abbas