
पूरे कॉलेज में मेरे कोई न था उस की तरह
मुख़्तलिफ़ सब से हक़ीक़त में मेरी वाली थी
उस से मंसूब थे त्योहार सभी ख़ुशियों के
वो मेरी ईद थी दशहरा थी दीवाली थी
— Shajar Abbas
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