
तुम्हारे नाम को जब क़ाफ़िया बनाया गया
तो सानी मिसरा सभी होंटों पर सजाया गया
जो मुनकिरान-ए-मोहब्बत थे बज़्म-ए-इशरत में
कलेजा उन का शजर रात भर जलाया गया
— Shajar Abbas
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