आगही बढ़ने लगी है
ख़ामुशी बढ़ने लगी है
दिल-लगी बढ़ने लगी है
हर ख़ुशी बढ़ने लगी है
रू-ब-रू तुम जो हुए तो
शायरी बढ़ने लगी है
दोस्तों से अब हमारी
दुश्मनी बढ़ने लगी है
आप बैठे तख़्त पर और
रहज़नी बढ़ने लगी है
नौकरी लगती नहीं और
'उम्र भी बढ़ने लगी है
धीरे धीरे ही सही पर
आशिकी बढ़ने लगी है
इक कमी के वास्ते आज
हर कमी बढ़ने लगी है
सुब्ह की उम्मीद में और
तीरगी बढ़ने लगी है
राह तकते तकते गोया
बेकली बढ़ने लगी है
रोग भी बढ़ने लगा और
बे-ख़ुदी बढ़ने लगी है
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