तितलियों की यही कहानी है
फूल से कुछ महक चुरानी है
दिल के सब ग़म इसे थमा दूँ क्या
आज पहलू में शादमानी है
ख़ूँ टपकता है आँख से लेकिन
ये तो सबकी नज़र में पानी है
जाने किस बात का कमाल है जो
हिज्र में वस्ल की रवानी है
जाने किस बात का मलाल है जो
वस्ल में हिज्र की रवानी है
माह भर का न साल भर का यार
वो तिरा हिज्र जावेदानी है
सोहबत-ए-यार मिल गया मुझ को
वाह क्या दौर-ए-शादमानी है
वो मिरे ज़र्रे ज़र्रे में है बसा
इतनी सी सिर्फ़ ये कहानी है
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