titliyon ki yahii kahaanii hai | तितलियों की यही कहानी है

  - shaan manral

तितलियों की यही कहानी है
फूल से कुछ महक चुरानी है

दिल के सब ग़म इसे थमा दूँ क्या
आज पहलू में शादमानी है

ख़ूँ टपकता है आँख से लेकिन
ये तो सबकी नज़र में पानी है

जाने किस बात का कमाल है जो
हिज्र में वस्ल की रवानी है

जाने किस बात का मलाल है जो
वस्ल में हिज्र की रवानी है

माह भर का न साल भर का यार
वो तिरा हिज्र जावेदानी है

सोहबत-ए-यार मिल गया मुझ को
वाह क्या दौर-ए-शादमानी है

वो मिरे ज़र्रे ज़र्रे में है बसा
इतनी सी सिर्फ़ ये कहानी है

  - shaan manral

Gham Shayari

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