ik azaad si titli ke man jaisi tu | इक आज़ाद सी तितली के मन जैसी तू

  - SHIV SAFAR

इक आज़ाद सी तितली के मन जैसी तू
'उम्र की हर दहलीज़ पे बचपन जैसी तू

जिसको सुन के सोई रातें जग जाए
दुल्हन के घुँघरू की छन छन जैसी तू

सूरत ऐसी है जैसे हो नील गगन
ना-उम्मीदी में भी जीवन जैसी तू

सूरज जिसको छू के चाँद सा बन जाए
सच मुच में उस चंदन के तन जैसी तू

जिस इक रुपए में बचपन की खुशियाँ थी
जेब में उन सिक्कों की खन खन जैसी तू

  - SHIV SAFAR

Sach Shayari

Our suggestion based on your choice

More by SHIV SAFAR

As you were reading Shayari by SHIV SAFAR

Similar Writers

our suggestion based on SHIV SAFAR

Similar Moods

As you were reading Sach Shayari Shayari