वैसे तो कम दिनों की है ये माह-ए-फ़रवरी
लेकिन है आके ख़ूब सताए ये फ़रवरी
रखना ये दिल सँभाल के तुम अपना दोस्तों
फिरने लगी है फिर से वबा बनके फ़रवरी
यूँँॅं आशिकों को टूटते देखा न जाए अब
कोई निकाल दो ये कलेंडर से फ़रवरी
तेरे ही जैसी वो भी थी, रोती है मेरे बिन
मुझ सेे नहीं उलझना तू ये सुन ले फ़रवरी
क्या क्या कहा तू मुझको सताएगी 'उम्र भर
देखे हैं तेरे जैसे बहुत जा रे फ़रवरी
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