जिसे जो हो पसंद उसकी वही पहचान लिख देना
मैं फ़ौजी हूॅं मेरी मय्यत पे हिंदुस्तान लिख देना
वतन की लाज रखने में जो मेरी लाश बिछ जाए
तो इसको मुझ पे मेरे देश का एहसान लिख देना
कि मेरी रूह से आए हमेशा मिट्टी की ख़ुश्बू
मेरे सीने पे मेरे खेत और खलिहान लिख देना
अगर कल लौट के वापस न जा पाऊँ मैं घर अपने
तो मेरी माँ को इक ख़त में मेरे अरमान लिख देना
मैं मर भी जाऊँ तो ज़िंदा रहूॅं मेरे जनाज़े पर
वो मेरा गाँव मेरा घर मेरा दालान लिख देना
ख़ुदा की नेमतों से गर इसी मिट्टी में फिर जन्मा
तो यारों फिर वतन के नाम मेरी जान लिख देना
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by SHIV SAFAR
our suggestion based on SHIV SAFAR
As you were reading Gulshan Shayari Shayari