jise jo ho pasand uski vahii pahchaan likh dena | जिसे जो हो पसंद उसकी वही पहचान लिख देना

  - SHIV SAFAR

जिसे जो हो पसंद उसकी वही पहचान लिख देना
मैं फ़ौजी हूॅं मेरी मय्यत पे हिंदुस्तान लिख देना

वतन की लाज रखने में जो मेरी लाश बिछ जाए
तो इसको मुझ पे मेरे देश का एहसान लिख देना

कि मेरी रूह से आए हमेशा मिट्टी की ख़ुश्बू
मेरे सीने पे मेरे खेत और खलिहान लिख देना

अगर कल लौट के वापस न जा पाऊँ मैं घर अपने
तो मेरी माँ को इक ख़त में मेरे अरमान लिख देना

मैं मर भी जाऊँ तो ज़िंदा रहूॅं मेरे जनाज़े पर
वो मेरा गाँव मेरा घर मेरा दालान लिख देना

ख़ुदा की नेमतों से गर इसी मिट्टी में फिर जन्मा
तो यारों फिर वतन के नाम मेरी जान लिख देना

  - SHIV SAFAR

Gulshan Shayari

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