shakl nahin milti hai par ab kuchh aisa kar jaaun main | शक्ल नहीं मिलती है पर अब कुछ ऐसा कर जाऊँ मैं

  - SHIV SAFAR

शक्ल नहीं मिलती है पर अब कुछ ऐसा कर जाऊँ मैं
ताकि अब अपने कर्म से पापा बिल्कुल तुझ पर जाऊँ मैं

माँ को तन्हा छोड़ आया था कुछ बनने की चाहत में
लेकिन अब इस सोच में हूँ क्या मुँह ले के घर जाऊँ मैं

कर ही क्या पाया मैं अब तक कुछ ग़ज़लें कहने के सिवा
कभी कभी तो जी करता है कुछ खा के मर जाऊँ मैं

ऐसा नहीं कि अपने घर की फ़िक्र नहीं मुझको लेकिन
सारी ज़िल्लत इस ख़ातिर है ताकि बड़ा कर जाऊँ मैं

सुना है तुझ से ठोकर खाकर लोग सँवरने लगते हैं
सोचता हूँ तेरे चौखट पर दिल अपना धर जाऊँ मैं

  - SHIV SAFAR

Chaahat Shayari

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