ye jo kambakht zindagi hai abhii | ये जो कमबख़्त ज़िंदगी है अभी

  - SHIV SAFAR

ये जो कमबख़्त ज़िंदगी है अभी
मौत की राह में अड़ी है अभी

ख़त्म इस
में से भी हो अक्स उसका
ये जो ले दे के शायरी है अभी

बे-वजह क्यूँँ कुरेदते हो वरक़
कौन सी बात अनकही है अभी

अब जहाँ माँ को गालियाँ देगा
एक बच्चे ने भूल की है अभी

बोलता था तो फूल झड़ते थे
शख़्स जो मिस्ल-ए-ख़ामुशी है अभी

जल्द पड़ जाएगा बदन नीला
कुछ ही पल की ये मुफ़लिसी है अभी

वक़्त ज़ाया' मैं कर नहीं सकता
मेरे ज़िम्में ये आशिक़ी है अभी

तुझको अपनों से दूर कर देगी
वो जो अपनी सी लग रही है अभी

है मु'अय्यन सफ़र की मौत वहीं
आने वाली जो इक गली है अभी

  - SHIV SAFAR

Bekhabri Shayari

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