ज़िंदगी में मेरी इक दिन कभी ऐसा आए
मुझको ख़ुद मेरे ही हालात पे रोना आए
पा तो सकता हूॅं तुझे भी किसी मंज़िल की तरह
हाँ मगर पहले मुझे ख़ुद को तो खोना आए
उसको अपनाने में तुम देर ज़रा भी न करो
वो है जैसा भी अगर हू-ब-हू वैसा आए
जी में आता है लिपट तुझ सेे यूँॅं रोऊॅं जैसे
माँ से लगने गले रोता हुआ बच्चा आए
इक दु'आ मैंने भी की है कि मैं ऐसे डूबूॅं
फिर बचाने न मुझे कोई भी तिनका आए
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