zindagi men meri ik din kabhi aisa aa.e | ज़िंदगी में मेरी इक दिन कभी ऐसा आए

  - SHIV SAFAR

ज़िंदगी में मेरी इक दिन कभी ऐसा आए
मुझको ख़ुद मेरे ही हालात पे रोना आए

पा तो सकता हूॅं तुझे भी किसी मंज़िल की तरह
हाँ मगर पहले मुझे ख़ुद को तो खोना आए

उसको अपनाने में तुम देर ज़रा भी न करो
वो है जैसा भी अगर हू-ब-हू वैसा आए

जी में आता है लिपट तुझ सेे यूँॅं रोऊॅं जैसे
माँ से लगने गले रोता हुआ बच्चा आए

इक दु'आ मैंने भी की है कि मैं ऐसे डूबूॅं
फिर बचाने न मुझे कोई भी तिनका आए

  - SHIV SAFAR

Aawargi Shayari

Our suggestion based on your choice

More by SHIV SAFAR

As you were reading Shayari by SHIV SAFAR

Similar Writers

our suggestion based on SHIV SAFAR

Similar Moods

As you were reading Aawargi Shayari Shayari