“रख हौसला”
दिल की बस्ती में छाया है डर का समाँ
छोड़ साँसें चलीं धड़कनों का मकाँ
फिर भी कहती हैं उम्मीद की तितलियाँ
मुस्कुराएगा फिर से ये अपना जहाँ
बस तू रख हौसला बस तू रख हौसला
दिन वो लौटेंगे फिर बस तू रख हौसला
माना अपने घरों में सभी बंद है
दिल की हर ख़्वाहिशों को ही ख़ुद मार के
माना ये भी कि अब अपनी ये ज़िन्दगी
दिल के कोने में बैठी है थक हार के
फिर भी जीने की उम्मीद मत छोड़ना
कर लो तुम अपने फिर हसरतों को जवाँ
सुन ये कहती हैं उम्मीद की तितलियाँ
मुस्कुराएगा फिर से ये अपना जहाँ
बस तू रख हौसला बस तू रख हौसला
दिन वो लौटेंगे फिर बस तू रख हौसला
रात के बा'द होती है जैसे सहर
मुश्किलों का अँधेरा भी छट जाएगा
एक दूजे का ग़म जितना बाटेंगे हम
उतनी जल्दी ही ये दिन भी कट जाएगा
माना अपनों से ही डर है लगने लगा
आँखों के सामने छा रहा है धुआँ
फिर भी कहती हैं उम्मीद की तितलियाँ
मुस्कुराएगा फिर से ये अपना जहाँ
बस तू रख हौसला बस तू रख हौसला
दिन वो लौटेंगे फिर बस तू रख हौसला















