“उसे बारिश पसंद है”
कि पूछो ये बादल कहाँ जा रहा है
अगर उस के घर का पता जानता है
तो कह दो ये पैग़ाम पहुँचा दे मेरा
न कटती हैं रातें न बीते सवेरा
कि बिन उस के आँखें ये सोती नहीं हैं
किसी और से बातें होती नहीं हैं
ये कहना उसे और कब तक पुकारूँ
वो लौट आए कितनी दुआ और माँगू
अगर कुछ वो सुनने को राज़ी नहीं हो
लगे या मुझे जानती ही नहीं हो
तो तू उस की नादानियों को भुला कर
चले आना चुपके से बूँदे गिरा कर
वो क्या है कि बारिश पसंद उस को है ना!
— SHIV SAFAR















