hamesha shaayri hi gungunaana jaante ho kya | हमेशा शाइरी ही गुनगुनाना जानते हो क्या

  - Shivsagar Sahar

हमेशा शाइरी ही गुनगुनाना जानते हो क्या
हुनर इसके सिवा कोई दिखाना जानते हो क्या

न जाने क्यूँँ मिरे दिल को हमेशा ज़ख़्म देते हो
बताओ ज़ख़्म पर मरहम लगाना जानते हो क्या

किसी के 'इश्क़ में हदस गुज़र जाने से कुछ हटकर
लुटाना 'इश्क़ में क़ारूँ ख़ज़ाना जानते हो क्या

किसी माशूक़ को घायल बनाने के लिए अक्सर
नज़र से तीर हँसकर तुम चलाना जानते हो क्या

सहर के 'इश्क़ की दुनिया में जीने के लिए घुटकर
किसी को 'इश्क़ में पागल बनाना जानते हो क्या

  - Shivsagar Sahar

Pagal Shayari

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