हम ने होकर देख लिया है तू भी देख चुनिंदा होकर
आँसू से भीगी आँखों का इक बारी बाशिंदा होकर
चैन नहीं मिल पाता है चाहे जितना भी ऊँचा उड़ लो
बात न मानो मेरी तो फिर देखो ख़ुद से परिंदा होकर
जैसा फ़िल्मों में होता है बचपन से वैसी ख़्वाहिश है
मुझ को भी मिल जाओ पापा तुम वैसे ही ज़िंदा होकर
— Shobhit Dixit















