आदमी को आदमी खलता रहेगा

उम्र-भर ये सिलसिला चलता रहेगा

रौशनी का काम सब अंधे करेंगे
हाथ पर सबके दिया जलता रहेगा

वो मिलेगा एक दिन इस राह पे तू
यार कब-तक इस तरह चलता रहेगा

लोग जो कहते नहीं हैं दुख किसी से
शा'इरी में वो सदा ढलता रहेगा

— Subodh Sharma "Subh"

More by Subodh Sharma "Subh"

Other ghazal from the same pen

See all from Subodh Sharma "Subh" →

Raasta Shayari

Shers of raasta.

All Raasta Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling