ये परचम इश्क़ का वो धर चुका थामोहब्बत थी हमें वो कर चुका थामिला था जब मुझे पहले-पहल वोमियाँ मैं तो उसी दिन मर चुका थाग़ज़ल के वास्ते फिर से उठाईवगरना मैं क़लम तो धर चुका थालिखा था ज़िंदगी पर उस से पहलेमोहब्बत का मैं कालम भर चुका था— Subodh Sharma "Subh"