दोनों को मिली है इक उम्मीद मुबारक हो

तुम सर्द का मौसम हम ख़ुर्शीद मुबारक हो

है एक ख़ुदा जैसे वैसे ही है मेरा दिल
मानिंद उसी के मैं तौहीद मुबारक हो

कुछ देर यहाँ बैठो वो चाँद झुलस जाए
फिर ख़ुद ही कहे ख़ुद से ये दीद मुबारक हो

जिस को भी मिलो हँस के ये एक हिदायत दो
गुड़िया ये उसे कहना तुम ईद मुबारक हो

— Subodh Sharma "Subh"

More by Subodh Sharma "Subh"

Other ghazal from the same pen

See all from Subodh Sharma "Subh" →

Khuda Shayari

Shers of khuda.

All Khuda Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling